21 नवंबर 2025 को कोलकाता और उसके आसपास के इलाके एक असामान्य अनुभव से गुजरे। Earthquake Kolkata की वजह से बांग्लादेश में आए 5.7 तीव्रता वाले भूकंप ने शहर के कई हिस्सों में झटके महसूस कराए। अगर आप पार्क स्ट्रीट पर कॉफी पी रहे थे या विक्टोरिया मेमोरियल के बगीचों में टहल रहे थे, तो यह अनुभव काफी डरावना रहा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि शहर की सुरक्षा के लिए हमें सजग रहना चाहिए।
कोलकाता का भूकंपीय इतिहास: पुरानी यादें जो अभी भी गूंजती हैं
कोलकाता को आमतौर पर भूकंप के लिए अत्यधिक जोखिम वाला शहर नहीं माना जाता, लेकिन इसका इतिहास बताता है कि यह क्षेत्र कभी-कभी झटकों का सामना करता रहा है।
प्रमुख ऐतिहासिक भूकंप:
- 1897 शिलांग भूकंप (तीव्रता 8.7): असम के शिलांग से आया यह भूकंप कोलकाता में दीवारों में दरारें और भवनों में नुकसान लाया।
- 1934 बिहार-नेपाल भूकंप (तीव्रता 8.1): नेपाल से आए इस झटके ने पुरानी इमारतों को हिलाया और शहर के कई हिस्सों में नुकसान पहुंचाया।
- 1918 श्रीमंगाल भूकंप (तीव्रता 7.6): हल्के झटके, लेकिन लोगों को सतर्क करने के लिए पर्याप्त।
- 1737 कथित कलकत्ता भूकंप: कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह भूकंप था, जबकि आधुनिक रिसर्च इसे चक्रवात मानती है।
यह इतिहास बताता है कि भले ही कोलकाता सीधे भूकंपीय जोन में न हो, लेकिन Earthquake kolkata किसी भी समय एक वास्तविक खतरे की तरह महसूस हो सकता है।
Earthquake kolkata का जोन: मध्यम जोखिम लेकिन सतर्क रहना जरूरी

भारत को भूकंपीय जोनों में बांटा गया है। कोलकाता ज्यादातर Zone III में आता है, जो मध्यम जोखिम वाला क्षेत्र है। पड़ोसी राज्य जैसे सिक्किम और असम उच्च जोखिम वाले जोन IV और V में हैं। इसका मतलब यह है कि पड़ोसी क्षेत्रों में आने वाले भूकंप के झटके कोलकाता तक महसूस हो सकते हैं।
| जोन | जोखिम स्तर | उदाहरण क्षेत्र | संभावित तीव्रता |
|---|---|---|---|
| II | कम | गुजरात का मैदानी हिस्सा | 5 से कम |
| III | मध्यम | कोलकाता, मुंबई का हिस्सा | 5-6 |
| IV | उच्च | दिल्ली, पुणे | 6-7 |
| V | बहुत उच्च | हिमालय, गुजरात कच्छ | 7 से ऊपर |
कोलकाता में मिट्टी नरम है, गंगा डेल्टा के कारण, जो भूकंप के दौरान तरलकरण (liquefaction) का खतरा बढ़ाती है। इसका मतलब है कि जमीन थोड़ी ‘नरम’ हो सकती है और ऊंची इमारतें अस्थिर महसूस कर सकती हैं।
आज का भूकंप: बांग्लादेश से आई चेतावनी
21 नवंबर 2025 को सुबह 10:08 बजे ढाका के पास बांग्लादेश में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया। कोलकाता में लोग हिलते-डुलते घरों और ऑफिसों में सुरक्षित स्थान की तलाश में थे। हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, फिर भी यह याद दिलाता है कि Earthquake kolkata का खतरा हमेशा मौजूद है।
पूर्वोत्तर भारत और बंगाल के अन्य जिलों में भी झटके महसूस किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हिमालय की टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियों का परिणाम था।
भूकंप से सुरक्षा: घर पर आसान ट्रिक्स
NDMA के अनुसार, भूकंप के दौरान इन टिप्स का पालन करें:
- भूकंप के दौरान: ड्रॉप, कवर, होल्ड ऑन! मजबूत टेबल के नीचे छिपें, खिड़की और दरवाजों से दूर रहें।
- बाहर होने पर: खुली जगह पर जाएं, पेड़ और बिजली के तार से दूर रहें।
- बाद में: गैस लीक चेक करें, पानी स्टोर करें।
- तैयारी: इमरजेंसी किट बनाएं, बच्चों को भूकंप ड्रिल सिखाएं।
ये आसान उपाय न सिर्फ Earthquake kolkata के लिए बल्कि जीवन के अन्य अप्रत्याशित हालात में भी मददगार साबित होंगे।
भविष्य की तैयारी: कोलकाता को मजबूत बनाएं
वैज्ञानिकों के अध्ययन अनुसार, कोलकाता का 19% हिस्सा उच्च जोखिम में है। सरकार भूकंप-रोधी इमारतों का निर्माण कर रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को भी सजग रहना चाहिए। पुरानी इमारतों की जांच करवाना और इमरजेंसी प्लान तैयार करना आवश्यक है। जैसे दूर्गा पूजा के पंडाल सुरक्षित और मजबूत बनाए जाते हैं, वैसे ही शहर की नींव को भी मजबूत बनाने की जरूरत है।
Earthquake Kolkata ने आज हमें याद दिलाया कि भले ही शहर सामान्य रूप से सुरक्षित हो, लेकिन कभी भी झटके आ सकते हैं। सावधानी, तैयारी और सतर्कता ही हमें इस प्राकृतिक खतरे से बचा सकती है। अपने परिवार के साथ आपदा योजना बनाएं और इस जानकारी को साझा करें ताकि और लोग भी सतर्क रहें।
Disclaimer: यह जानकारी केवल जागरूकता और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए है। Earthquake Kolkata जैसी आपदाओं में हमेशा स्थानीय अधिकारियों और NDMA की सलाह का पालन करें।
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